Wednesday, November 15, 2017

हम दीवानो की हर बात ख्याली है

हम दीवानो की हर बात ख्याली है
बड़ी बड़ी बातें है और जेबें खाली है
कोई काम नहीं फिर भी रोज चाँद पे जाना है
रात और दिन उनका बस रूठना मनाना है
सावन के अंधे है हर और हरयाली है
हम दीवानो की हर बात ख्याली है
जुओ वाले बालो को घटाए काली कहते है
पसीने की बदबू को भी खुशबू कहते है
पैदाइशी झूठे है हर बात निराली है
हम दीवानो की हर बात ख्याली है
सल्तनत लुटी सारी दीदार की खातिर
भिकमंगे हो गए है इस प्यार की खातिर
एक एक पैसे के हर दर के सवाली है
हम दीवानो की हर बात ख्याली है
उस चाँद से मुखड़े का मेकअप जो हट जाए
हम उसमे समा जाये जो ये धरती  फट जाए
हुस्न की दुनिया के  हम रखवाली है
हम दीवानो की हर बात ख्याली है

Sunday, November 12, 2017

थोडा आशिकी का खुमार रहने दे

थोडा आशिकी का खुमार रहने दे
अभी ठीक हूँ, कुछ दिन बीमार रहने दे
तुझे नफरत है तो करता रह मुझसे
मेरे मन में बस अपना प्यार रहने दे
बड़ी बड़ी बाते किस काम की मेरे
मुझे तो बच्चों में शुमार रहने दे
तुझे चाँद की चाहत है तो छू ले
मेरे हिस्से में धरती की बहार रहने दे
फाईफ स्टार का पिकल तुम बनो
मुझे माँ के हाथ का अचार रहने दे
बड़े सपनो की कीमत भी बड़ी होगी
मुझे जीवन के सच का बाजार रहने दे

Saturday, November 11, 2017

ना हंसने की गलती की

ना हंसने की गलती की, और ना रोने का मजा लिया
सीधे से इस जीवन को , जटिल इतना क्यों बना लिया
किसी अदा पर मर मिटना
और किसी ख्याल में खोये रहना
तुम बिन जीना बड़ा मुश्किल है
किसी को मन से ये कहना
तुम्हे देख कर जीते है , तुम्हे अपना सब कुछ बना लिया
ना हंसने की गलती की, और ना रोने का मजा लिया
किसी की यादो में खोकर
ना आँखों से नीर बहाया है
ना सपने सजाये किसी के मन में
ना कोई सपनो में आया है
ना किसी की साँसों में बसे,न  किसी को आँखों में सजा लिया
ना हंसने की गलती की, और ना रोने का मजा लिया

Wednesday, November 8, 2017

दो पग तुम भी चले आते

प्यारी सी ख़ुशी से हमारी भी मुलाकात होती
दो पग तुम भी चले आते तो क्या बात  होती
              हम तो चले मीलों तेरी एक झलक पाने को
              पलके बिछाये बैठे थे महबूब के आने को
               तेरा दीदार ही मुहब्बत की सौगात होती
                दो पग तुम भी चले आते तो क्या बात  होती
अपनी आँखों को मेरी आँखों से मिला जाते
कुछ पल को ही सही अगर तुम आ जाते
मेरी आँखों से ना यूं मोतियो की बरसात होती
दो पग तुम भी चले आते तो क्या बात  होती
                    माना बड़े वयस्त हो बहुत काम करते हो
                    छुट्टी नहीं लेते कभी ना आराम करते हो
                    काश मेरी भी रोजी रोटी तुम्हारे साथ होती
                    दो पग तुम भी चले आते तो क्या बात  होती
तुम्हारी उम्र बीत जायेगी यहाँ पैसा कमाने में
लेकिन दोस्त कहाँ पाओगे मुझ सा जमाने में
काश मेरे प्रेम की लकीर भी तुम्हारे हाथ होती
दो पग तुम भी चले आते तो क्या बात होती
                   तुम जो अपने रिश्तो को यूं ही गवाओगे
                   याद रखना एक दिन अकेले ही रह जाओगे
                   अपनों के आगे ना सपनो की औकात होती
                   दो पग तुम भी चले आते तो क्या बात होती